इंडियन पेनल कोड 498 A

इंडियन पेनल कोड 498 A दहेज एवं महिला को इसके खिलाफ लड़ने के लिए सशक्त बनाता हैं।आज के समय में समाज की सबसे बड़ी समस्या है जिसके खिलाफ आवाज उठाने के लिए लोग कतराते हैं उनका मानना है कि अगर इसके खिलाफ आवाज उठाने से उन्हे इस चीज का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। दहेज को रोकने के लिए दहेज निषेध अधिनियम 1961 बनाया गया जिसमें इसके संबंध मे सजा के प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत अगर पति द्वारा पत्नी को किसी भी रुप से प्रताड़ित किया जाता है तो उसको सजा देने के प्रावधान भी इसी में शामिल किए गए हैं। वर्तमान समय में इसकी चर्चा में आने का कारण है इस सेक्शन का दुरुपयोग करना। जिसमें प्रथम हैं झूठी शिकायतें दर्ज होना, चंद्रभान बनाम संघ मामला 2008 जिसमे दिल्ली उच्च न्यायालय का मानना था कि सेक्शन 498 ए के तहत दर्ज होने वाली अधिकतम शिकायतें छोटे घरेलू झगड़े तथा अहंकार संबंधी झगड़े हैं जिनकी संख्या अधिकतम होने के कारण ऐसी शिकायतों को स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस समस्या के निवारण के लिए प्रावधान किए गए हैं कि अगर ऐसी समस्या आती है तो उन की जांच एक पुलिस अधिकारी तथा परिवार कल्याण समिति से करवाई जानी चाहिए अगर ऐसी जांच में शिकायत सही पायी जाती हैं तो ही उसे न्यायालय में रखा जाएगा। इसका दूसरा कारण महिलाओं द्वारा आर्थिक फायदे के लिए इसका दुरुपयोग किया जाना। सुशील कुमार शर्मा बनाम भारतीय संघ मामले में न्यायालय का मानना है कि यह न्यू लीगल टेररिज्म है। हाल ही में राजेश शर्मा व अन्य बनाम उत्तर प्रदेश के मामले में न्यायालय का मानना है कि अधिकतम महिलाओं द्वारा इस सेक्शन का दुरुपयोग किया जा रहा है तथा इस वजह से कानून कमजोर हो गया है जो किसी के प्रति पक्षपात तक सीमित हो गया है । न्यायलय द्वारा वर्तमान में निर्णय लिया गया है कि आदमियों पर तब तक कोई कार्यवाही नहीं की जाएगी जब तक दोष सिद्ध ना हो जाए।

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