कर्नाटक में लिंगायत समुदाय को अलग धर्म का दर्जा प्राप्त

 

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आगामी विधानसभा चुनाव को मद्देनजर रखते हुए कर्नाटक कि स्थानीय कांग्रेस सरकार ने लिंगायत विशेष समुदाय को अलग धर्म  का दर्जा प्रदान किया है, इसमें  इन्हे  अल्पसंख्यक का दर्जा प्रदान किया जाएगा।  कर्नाटक सरकार  के अनुसार यह फैसला राज्य अल्पसंख्यक आयोग द्वारा की गई सिफारिश के अनुसार लिया गया इस मामले में अंतिम अधिकार केंद्र सरकार के पास है।

कौन हैं लिंगायत

लिंगायत भारतवर्ष का प्राचीनतम धर्म का हिस्सा है ।इसके अधिकतर अनुयायी  दक्षिण भारत में है, इस धर्म के लोग भगवान शिव को आराध्य देव मानकर उनकी उपासना करते हैं अन्य शब्दों में कहा जा सकता है कि यह शैव संप्रदाय का ही हिस्सा है।  इस संप्रदाय की स्थापना 12 वीं शताब्दी में महात्मा बसवण्णा ने की थी। जिसके उपासक लिंगायत कहलाए। लिंगायत शब्द कन्नड भाषा से ही व्युत्पन्न हैं। ये महात्मा बसवण्णा की शिक्षा के ही अनुयायी हैं।ये भगवान शिव की स्तुति आराधना पर आधारित है.भगवान शिव जो सत्य सुंदर और सनातन हैं जिनसे सृस्टि का उद्गार हुआ.जो आदि अनंत हैं.हिंदु धर्म मे त्रिदेवों का वर्णन है जिसमे सर्वप्रथम भगवान शिव का ही नाम आता है शिव जिनसे सृष्टि की उत्पत्ति हुई. इसके पश्चात भगवान ब्रम्ह की उत्पत्ति जो सम्पूर्ण जगत को जीवन प्रदान करते हैं.भगवान विष्णु जो सम्पूर्ण जगत के पालनहार हैं .तीसरे अंश भगवान महेश (शंकर) की उत्पत्ति जीवन अर्थात अमुक्त आत्माओं को नष्ट करके पुनः जीवन मुक्ति चक्र में स्थापित करना है। लिंगायत सम्प्रदाय भगवान शिव जो कि ब्रम्ह, विष्णु, महेश, चराचर जगत के उत्पत्ति के कारक हैं उनकी स्तुति आराधना करता है।

इनका राजनीतिक महत्व

कर्नाटक की अगड़ी जति में गिने जाने वाले इस समुदाय का प्रतिनिधित्व 18 फ़ीसदी है कर्नाटक की राजनीतिक पृष्ठभूमि में इनका हम योगदान है 90 के दशक के पश्चात रामकृष्ण हेगड़े इनके नेता बने तथा हेकड़े के निधन के पश्चात BJP के यदुरप्पा इनके नेता बने इनके अधिक जनाधार के कारण सियासत इन के इर्द-गिर्द घूमती है, इस बार कर्नाटक चुनावो में वास्तव इनका महत्व पूर्ण योगदान रहा जोंकी राजनीति के फेर बदल में भूमिका अदा करती हैं। वर्तमान में हुए चुनावो में भारतीय जनता पार्टी को ज्यादा सीटें आने के बावजूद सरकार बनाने का मौका नहीं दिया गया और कांग्रेस ने जे डी एस के साथ मिल कर सरकार बनाई।

 

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