राजस्थान का एकीकरण

राजस्थान का एकीकरण

आजादी की घोषणा के साथ ही पूरे भारत को एक सूत्र में पिरोने के लिए भारतीय रियासती विभाग की स्थापना 5 जुलाई 1947 को की गई। सरदार वल्लभ भाई पटेल को इसका अध्यक्ष तथा वीपी मैनन को सचिव नियुक्त किया गया। नरेंद्र मंडल सम्मेलन के दौरान माउंटबेटन द्वारा देशी राजाओं के सामने दो प्रकार के समझौते रखे गए इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन और स्टैंड स्टिल एग्रीमेंट,  जिसके तहत क्रमशः या तो भारत संघ में शामिल हो जाए या फिर वह यथास्थिति बनाए रखें। भारतीय संघ में विलय होने  के लिए सबसे पहले हस्ताक्षर बीकानेर नरेश सार्दुल सिंह ने किये तथा सबसे अंतिम हस्ताक्षर धौलपुर नरेश उदयभान सिंह ने किये थे। एकीकरण के समय राजस्थान में 19 रियासतें 3 ठिकाणे  (नीमराणा , लावा  व  कुशलगढ़ )और एक केंद्र शासित प्रदेश था। नरेंद्र मंडल के वर्तमान अध्यक्ष भोपाल के नवाब ने राजपूताने को पाकिस्तान में मिलाने के लिए प्रेरित किया।

देशी राजाओं द्वारा बनाए गए संघ

  •  इस तरह का प्रथम प्रयास कोटा महाराव भीमसिंह ने किया था।   
  • राजस्थान यूनियन बनाने का प्रयास मेवाड़ महाराणा भोपाल सिंह द्वारा किया गया   
  • राजपूताना संघ जयपुर के महाराजा सवाई  मान  सिंह  द्वारा 
  • हाडोती संघ कोटा महाराव भीमसिंह द्वारा 
  • बागड़ संघ  डूंगरपुर महाराजा लक्ष्मण सिंह द्वारा

 

राजस्थान के एकीकरण में कुल  7 चरणों में हुआ।

मत्स्य संघ : 18 मार्च 1948

  • इसमें चार रियासत अलवर, भरतपुर, धौलपुर और करौली व एक ठिकाना नीमराणा को शामिल किया गया।
  • इसका उद्घाटन गॉड गिल द्वारा किया गया।
  • धौलपुर महाराजा उदय भान सिंह को राजप्रमुख, करौली महाराजा गणेश पाल को उप राजप्रमुख।
  • शोभाराम कुमावत को मत्स्य संघ का प्रधानमंत्री बनाया गया।
  • अलवर को मत्स्य संघ की राजधानी बनाया गया।
  • मतस्य संघ नाम के एम्  मुंशी द्वारा दिया गया

राजस्थान संघ: 25 मार्च 1948

  • इसमें शामिल होने वाली रियासतें कोटा, बूंदी, झालावाड़, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, टोंक, किशनगढ़, शाहपुरा  व एक ठिकाना कुशलगढ़ था।
  • कोटा महाराव भीमसिंह को राजप्रमुख बनाया गया। बूंदी नरेश बहादुर सिंह को वरिष्ठ राजप्रमुख, डूंगरपुर के लक्ष्मण सिंह को कनिष्ठ राजप्रमुख बनाया गया।
  • गोकुल लाल असावा को राजस्थान संघ का प्रधानमंत्री बनाया गया।
  • कोटा राजस्थान संघ की राजधानी बनी।
  • “मैं अपने डेथ वारंट पर साइन कर रहा हूं”  बांसवाड़ा महारावल चंद्रवीर सिंह।

संयुक्त राजस्थान :18 अप्रैल 1948

  • इस चरण के तहत राजस्थान संघ में मेवाड़ को मिला दिया गया जिससे संयुक्त राजस्थान का निर्माण हुआ।
  • संयुक्त राजस्थान का उद्घाटन जवाहरलाल नेहरू ने किया।
  • मेवाड़ महाराणा भूपाल सिंह राज प्रमुख बनाया गया कोटा महाराव भीमसिंह को वरिष्ठ  राजप्रमुख,  बूंदी महाराजा व डूंगरपुर महाराजा को कनिष्ठ राज्य प्रमुख मनाया गया।
  • संयुक्त राजस्थान की राजधानी उदयपुर को बनाया गया।
  • माणिक्य लाल वर्मा को प्रधानमंत्री तथा गोकुल लाल असावा को  उप प्रधानमंत्री बनाया गया।

वृहत राजस्थान : 30 मार्च 1949

  • इस चरण के दौरान संयुक्त राजस्थान में जयपुर, जोधपुर, जैसलमेर  व बीकानेर रियासतों को मिलाया गया।
  • उदयपुर महाराणा भोपाल सिंह को महाराज प्रमुख बनाया गया।
  • राजप्रमुख सवाई मानसिंह जयपुर।
  • वृहत  राजस्थान के प्रधानमंत्री हीरालाल शास्त्री को बनाया गया और इसका उद्घाटन वल्लभ भाई पटेल ने किया।

संयुक्त वृहद राजस्थान : 15 मई 1949

  • वृहद राजस्थान के तहत मत्स्य संघ को शामिल किया गया।
  • मत्स्य संघ का विलय शंकर देव समिति की सिफारिश पर किया गया था।

राजस्थान संघ : 26 जनवरी 1950

  • इस चरण के दौरान आबू तथा देलवाड़ा को छोड़कर शेष  सिरोही को राजस्थान में मिला दिया गया तथा 26 जनवरी 1950 को हमारे प्रदेश का नाम राजस्थान पड़ा।

राजस्थान : 1 नवंबर 1956

  • फजल अली आयोग की सिफारिश के आधार पर अजमेर मेरवाड़ा को राजस्थान में मिला दिया गया।
  • आबू देलवाड़ा का राजस्थान में विलय हो गया तथा मध्य प्रदेश के सुनेल टप्पा को राजस्थान में मिलाया गया वहीं राजस्थान का सिरोंज क्षेत्र मध्यप्रदेश में मिला दिया गया।
  • 1 नवंबर 1956 को राजस्थान का एकीकरण पूरा हुआ इस समय राजस्थान के सी एम मोहनलाल सुखाड़िया थे।
  • 7 वें संविधान संशोधन 1956 के द्वारा राजप्रमुख पद को समाप्त कर दिया गया तथा राजस्थान का पहला राज्यपाल सरदार गुरुमुख निहाल सिंह को बनाया गया।
  • अजमेर मेरवाड़ा पहले एक केंद्र शासित प्रदेश था तथा यहां 30 सदस्य की धारा सभा होती थी, यहां के मुख्यमंत्री हरिभाऊ उपाध्याय थे। हरिभाऊ उपाध्याय ने अजमेर का राजस्थान में विलय का विरोध किया।
  • सत्यनारायण राव समिति की सिफारिश के आधार पर जयपुर को राजधानी बनाया गया।

अन्य महत्वपूर्ण तथ्य

  • द स्टोरी ऑफ इंटीग्रेशन ऑफ इंडियन स्टेट्स- वीपी मैनन
  • एक्सेसन टू एक्सटिंसन – डी आर मानेकर
  • राजस्थान की रियासतों में सबसे पुरानी रियासत उदयपुर थी तथा सबसे नई रियासत झालावाड।
  • क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ी रियासत जोधपुर तथा सबसे छोटी रियासत शाहपुरा थी।
  • भारत स्वतंत्र होने के बाद जोधपुर डूंगरपुर अलवर भरतपुर के नरेश होने स्वतंत्र रहने की घोषणा की थी।

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